अटल तिरंगा सम्मान समारोह एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर नई दिल्ली में संपन्न



ऋषिकेश (आशीष कुकरेती) नई दिल्ली 27 दिसम्बर देशभक्ति, सेवा, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को समर्पित “अटल तिरंगा सम्मान समारोह” का भव्य एवं प्रेरणादायी आयोजन एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर, नई दिल्ली में अत्यंत गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ। यह समारोह राष्ट्रनिर्माण में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित करने हेतु आयोजित किया गया, जिसमें देश के राजनीतिक, सामाजिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र के अनेक विशिष्ट व्यक्तित्वों की गरिममायी उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और अधिक ऊँचाई प्रदान की।

इस ऐतिहासिक अवसर पर  स्वामी चिदानन्द सरस्वती  का पावन सान्निध्य, आशीर्वाद एवं प्रेरक उद्बोधन समारोह का केंद्रीय आकर्षण रहा। अपने उद्बोधन में स्वामी जी ने कहा कि तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, संस्कार और संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी जी के विचारों को स्मरण करते हुए कहा कि उनका जीवन राष्ट्रसेवा राजनीति से ऊपर उठकर एक तपस्या था, जब सेवा में संस्कार जुड़ जाते हैं तो वह युग परिवर्तन का माध्यम है।
स्वामी ने इस अवसर पर कैलास मानसरोवर की धरती पर तीन आश्रमों के निर्माण, इंसाइक्लोपीडिया ऑफ हिन्दूइज्म आदि का उल्लेख किया। इस अवसर पर सनातन और हिन्दूत्व का अद्भुत वर्णन किया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती  ने कहा कि आज के युवाओं को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को समझते हुए सेवा, सद्भाव और समर्पण के मार्ग पर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, यमुना स्वच्छता, भारतीय मूल्यों और वैश्विक शांति के लिए भारत की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

समारोह में  सांसद, दिल्ली  मनोज तिवारी  ने अपने संबोधन में कहा कि अटल तिरंगा सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उन मूल्यों का सम्मान है जिनके लिए भारत सदैव खड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि अटल जी का जीवन राष्ट्रभक्ति, संवाद और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का अनुपम उदाहरण है, और आज का यह समारोह उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।

विधायक, आर.के. पुरम, दिल्ली  अनिल शर्मा  ने कहा कि देश के लिए कार्य करने वाले व्यक्तियों का सार्वजनिक सम्मान समाज को सकारात्मक दिशा देता है। उन्होंने कहा कि तिरंगा हमें एकता, अखंडता और बलिदान की भावना सिखाता है, और ऐसे आयोजन नई पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम को सुदृढ़ करते हैं।

ललितानंद गिरि  महाराज, हरिद्वार ने कहा कि जब अध्यात्म और राष्ट्रभाव एक साथ चलते हैं, तब समाज में स्थायी परिवर्तन आता है। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान केवल भौतिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उसकी आध्यात्मिक चेतना से है, और तिरंगा उसी चेतना का प्रतीक है।

राजेश झा , अध्यक्ष, सेल्यूट तिरंगा, ने आयोजन की भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि इस सम्मान समारोह का उद्देश्य उन विभूतियों को सम्मानित करना है, जिन्होंने निस्वार्थ भाव से राष्ट्र, समाज और संस्कृति की सेवा की है। उन्होंने कहा कि अटल तिरंगा सम्मान, भारत के गौरवशाली अतीत और उज्ज्वल भविष्य के बीच एक सेतु है। भारत के लिये श्री अटल जी ने जो स्वप्न देखा था यह उसी का प्रतीकात्मक स्वरूप है।

समारोह में  सचिदानंद पोखरियाल , राष्ट्रीय महामंत्री, भारतीय जनता पार्टी, ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जी की सोच आज भी देश की राजनीति और नीतियों को दिशा दे रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र प्रथम की भावना ही भारत को विश्वगुरु के मार्ग पर आगे ले जाएगी।

इस अवसर पर देश के विभिन्न क्षेत्रों से आईं अनेक प्रतिष्ठित विभूतियों को “अटल तिरंगा सम्मान” प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वालों में सामाजिक सेवा, शिक्षा, संस्कृति, राष्ट्रसेवा और जनकल्याण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्व शामिल रहे।

समारोह का वातावरण राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगा हुआ था, जहाँ तिरंगे की गरिमा, अटल की स्मृतियाँ और भारत के उज्ज्वल भविष्य का संकल्प स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा था। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और देश के प्रति समर्पण की भावना के साथ किया गया।

अटल तिरंगा सम्मान समारोह न केवल एक आयोजन था, बल्कि यह भारत की चेतना, संस्कार और संकल्प का जीवंत उत्सव बनकर उभरा, जिसने उपस्थित सभी जनों को राष्ट्रसेवा के पथ पर और अधिक दृढ़ता से आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।


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