ब्रेकिंग

स्वामी चिदानंद मुनि जी के सानिध्य में कथा व्यास श्री श्याम भाई ठक्कर जी के श्री मुख से हरिद्वार में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा



 


मुनि की रेती (आशीष कुकरेती) हरिद्वार 3 नवम्बर मां गंगा के पावन तट पर स्थित विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक तीर्थ जहाँ युगों से धर्म, अध्यात्म और ज्ञान की धारा निरंतर प्रवाहित होती रही है, ऐसी पावन धरती हरिद्वार में भव्य श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन हुआ। इस दिव्य कथा के यजमान मुंबई के प्रतिष्ठित परमार्थ-भाव से दंपत्ति श्री अशोक भाई और उनकी धर्मपत्नी श्रीमति ज्योति जी द्वारा किया गया।
कथा व्यास श्री श्याम भाई ठक्कर जी ने भक्तों को श्रीमद् भागवत महापुराण के अद्भुत प्रसंगों की अपनी मधुर वाणी में व्याख्या की। उनका सरल, प्रभावशाली और प्रेरणादायक प्रवचन श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति, प्रेम और धर्म की अमृतधारा स्वरूप प्रवाहित होता रहा। श्रीकृष्ण लीला, भक्त प्रहलाद, ध्रुव चरित्र, सुदामा प्रसंग और गोवर्धन-उद्धार आदि प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने प्रेम, करुणा, भक्ति और धर्म की महत्ता का मनमोहक सन्देश दिया।
इस पावन कथा में परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज का दिव्य सान्निध्य प्राप्त हुआ। स्वामी जी ने अपने आध्यात्मिक संदेश में कहा कि श्रीमद् भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। उन्होंने कहा कि यह ग्रंथ हमें प्रेम के पथ पर चलने और जीवन को सेवा, समर्पण तथा करुणायुक्त बनाने की प्रेरणा देता है।
भागवत कथा वह है जो हमें भगवान के और निकट ले आए, उन्होंने कहा कि जहाँ कथा होती है वहाँ केवल कथा नहीं होती, वहाँ संस्कृति, संस्कार, सद्भाव और समरसता का प्रकाश होता है।
स्वामी जी ने कथा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और हरित जीवनशैली को अपनाने का दिव्य संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि धर्म और प्रकृति अलग नहीं हैं। माँ गंगा, माँ धरती, वृक्ष और जल, ये हमारी आस्था और अस्तित्व दोनों हैं। जिस दिन हमने प्रकृति को पूजा का केंद्र बना लिया, उस दिन पृथ्वी स्वर्ग बन जाएगी।
स्वामी जी की प्रेरणा से इस कथा को “हरित कथा” का स्वरूप प्राप्त हुआ, जहाँ आध्यात्मिक साधना और पर्यावरण संरक्षण एक साथ चलें। हम सब मिलकर ऐसा विश्व बनाएँ जहाँ धर्म केवल मंदिरों में न हो, बल्कि मन में भी हो। जहाँ दीप केवल घर में न जले, बल्कि जीवन में भी जले। जहाँ कथा केवल सुनने का विषय न रहे, बल्कि जीवन में उतारने का संकल्प बने।
कथा आचार्य श्री श्याम भाई ठक्कर जी ने कहा कि हरिद्वार की दिव्य धरती पर पूज्य संतों के पावन सान्निध्य में कथा गायन का अद्भुत आनंद है।
श्री अशोक भाई और श्रीमति ज्योति जी पूज्य स्वामी जी को अपने बीच पाकर गद्गद् हो उठे। उन्होंने कहा कि पूज्य संतों के श्रीचरणों से ही जीवन धर्मानुरागी बनाता है। स्वामी चिदानंद मुनि जी के सानिध्य में


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारे चैनल में आपका स्वागत है, खबरों व विज्ञापन के लिए संपर्क करें -+91 8859895608
error: Content is protected !!