

ऋषिकेश आशीष कुकरेती 13 अप्रैल गीता आश्रम स्वर्गाश्रम ऋषिकेश के संस्थापक ब्रह्मलीन स्वामी वेदव्यासानंद महाराज जी के 34 वें पुण्यतिथि पर्व के अवसर पर आयोजित भव्य धार्मिक कार्यक्रम अत्यंत श्रद्धा, उत्साह एवं भक्ति भावना के साथ संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सनातन धर्म विकास परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त) स्वामी रसिक महाराज की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा को और अधिक बढ़ा दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत पूजा-अर्चना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसके पश्चात भजन-कीर्तन एवं धार्मिक प्रवचनों की सुंदर श्रृंखला प्रस्तुत की गई। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लेकर आयोजन को सफल बनाया। पूरा परिसर “हरे कृष्ण” और “जय श्री राम” के जयकारों से गूंज उठा।
अपने ओजस्वी एवं प्रेरणादायक संबोधन में स्वामी रसिक महाराज ने ब्रह्मलीन स्वामी वेदव्यासानंद महाराज को एक सच्चा क्रांतिकारी, परिवर्तनकारी संत बताया और कहा कि संत और बसंत कभी भूतपूर्व नहीं होते। श्रीमद्भगवद्गीता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गीता मानव जीवन का सच्चा मार्गदर्शक ग्रंथ है, जो व्यक्ति को धर्म, कर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज को गीता के उपदेशों को अपनाने की अत्यधिक आवश्यकता है, जिससे जीवन में संतुलन, शांति और सकारात्मक सोच विकसित हो सके।
स्वामी जी ने युवाओं से विशेष आह्वान करते हुए कहा कि वे भारतीय संस्कृति एवं सनातन मूल्यों को समझें और अपने जीवन में उतारें। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में एकता, सद्भाव और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ावा देते हैं।
कार्यक्रम में राज्य मंत्री गिरीश डोभाल, गीता आश्रम ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ दीपक गुप्ता, वरिष्ठ साहित्यकार रामकृष्ण पोखरियाल, महन्त रवि प्रपन्नाचार्य, केशव स्वरूप ब्रह्मचारी, राजेश शर्मा, भानु प्रकाश शर्मा, कई संत-महात्माओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। आयोजन के अंत में सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया और आयोजकों द्वारा अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया।
पूरा कार्यक्रम भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ, जिसने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं के मन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

