ब्रेकिंग

पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक गूंजेगी नारी शक्ति की गूंज, नीति लाभार्थी से लेकर के नीति निर्माता बनेगी मातृशक्ति : कुसुम कंडवाल



ऋषिकेश (आशीष कुकरेती) देहरादून 15 अप्रैल उत्तराखंड राज्य महिला आयोग के तत्वावधान में आज राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के मुख्य सभागार में ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ का भव्य एवं गरिमामयी आयोजन किया गया। “पंचायत से पार्लियामेंट तक, निर्णय में नारी, नव भारत की तैयारी” के ध्येय वाक्य के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग किया।

मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि नारी शक्ति के सामर्थ्य के बिना राष्ट्र की वास्तविक उन्नति असंभव है। उन्होंने कहा:

“नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश की मातृशक्ति के सम्मान और अधिकार की दिशा में एक युगांतकारी कदम है। यह केवल संख्या बढ़ाने का प्रयास नहीं, बल्कि नीति-निर्माण की प्रक्रिया में महिलाओं की निर्णायक भागीदारी सुनिश्चित करने वाला क्रांतिकारी बदलाव है। आज की महिला खेत से लेकर देश की संसद तक नीति निर्धारण करने की क्षमता रखने वाली सशक्त नेतृत्वकर्ता है।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह समर्पित है। सरकारी सेवाओं में 30% आरक्षण और समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे ऐतिहासिक निर्णयों ने उत्तराखंड की महिलाओं के गौरव को बढ़ाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे शास्त्रों में कहा गया है शिव भी तभी समर्थ हैं जब वे शक्ति से युक्त हों, शक्ति के बिना कोई भी सृजन या सामर्थ्य संभव नहीं हो सकता है, इसलिए नारीशक्ति के सामर्थ्य के बिना राष्ट्र और समाज की वास्तविक उन्नति की कल्पना असंभव है। उन्होंने कहा कि आज की महिला खेत में अन्न उगाने वाली किसान भी है, तो स्टार्टअप खड़ा करने वाली एंटरप्रेन्योर भी है। वो गाँव की पंचायत में विकास की योजनाएँ बनाने वाली जनप्रतिनिधि भी है, तो देश की संसद में नीति निर्धारण करने की क्षमता रखने वाली सशक्त नेतृत्वकर्ता भी है

उन्होंने कहा कि आज तक हमारे देश की आधी आबादी को वो सम्मान नहीं मिल पाया है, जिसकी वो वास्तव में हक़दार है। परन्तु अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में नारी शक्ति को सम्मान और अधिकार दिलाने की दिशा में एक नए युग का शुभारंभ हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में शपथ लेने के बाद “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ”, “सुकन्या समृद्धि योजना”, “प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना”, “प्रधानमंत्री जन-धन योजना”, “मातृत्व वंदना योजना”, “स्वच्छ भारत मिशन” और “लखपति दीदी योजना” जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से मातृशक्ति का सम्मान सुनिश्चित करने का काम किया है।

महिला सशक्तिकरण के लिए समर्पित है प्रदेश सरकार’

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार भी मातृशक्ति के कल्याण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रही है। इसी क्रम में राज्य में शिक्षा, रोजगार उद्यमिता के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया गया है। राज्य सरकार द्वारा उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही, ’सशक्त बहना उत्सव योजना’ और ‘मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना’ के माध्यम से राज्य की मातृशक्ति को नए अवसर और शक्ति प्रदान करने का काम भी किया है। राज्य सरकार ‘‘मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना” के अंतर्गत महिला समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को एक ब्रांड के रूप में विकसित करने पर भी ध्यान दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “वोकल फॉर लोकल” और “लोकल टू ग्लोबल” की पहल के अंतर्गत, महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से “हाउस ऑफ हिमालयाज’’ नाम से अम्ब्रेला ब्रांड की शुरुआत की गई है। राज्य सरकार के प्रयासों से प्रदेश की 2 लाख 65 हजार से अधिक लखपति दीदियों की सालाना आय एक लाख से अधिक हो चुकी। प्रदेश सरकार ने जहां एक और महिलाओं के लिए सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत आरक्षण लागू किया वहीं, महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए “समान नागरिक संहिता” लागू की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 16 अप्रैल से संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विशेष सत्र प्रस्तावित है। कई दशकों से लंबित महिला आरक्षण का सपना अब साकार होने की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय कार्य करने वाली मातृशक्ति को सम्मानित भी किया।

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री  सावित्री ठाकुर ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानून नहीं बल्कि भारत के भविष्य को दिशा देने वाला परिवर्तनकारी प्रयास है। महिलाओं को संसद एवं विधानसभाओं में आरक्षण की व्यवस्था से महिलाओं की राजनीति में भागीदारी बढ़ेगी और निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल होने का अधिकार मिलेगा। अब महिलाएं भी हर बड़े फसलों में प्रभावी भूमिका निभाएंगी।

उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से महिलाओं का सम्मान, अधिकार और विश्वास में बढ़ोतरी होगी। प्रधानमंत्री जी ने हमेशा महिला नेतृत्व को प्राथमिकता दी है और उनका सशक्तिकरण किया है। उन्होंने कहा महिलाओं की यात्रा केवल अधिकारों की नहीं अपितु आत्म सम्मान, सुरक्षा और राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी तय करने की भी है।

उत्तराखंड सरकार में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती रेखा आर्या ने कहा कि यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के इतिहास में एक युगांतरकारी परिवर्तन की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को उनके अधिकारों के साथ आगे बढ़ाने का सशक्त माध्यम बनेगा और आने वाले समय में महिलाओं के नेतृत्व, आत्मविश्वास और भागीदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

कार्यक्रम में दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने भी अपने विचार रखे, उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक राजनीतिक आरक्षण नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के बौद्धिक नेतृत्व को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा में लाने का एक द्वार है। जब एक महिला शिक्षित और सशक्त होती है, तो वह केवल एक परिवार नहीं बल्कि पूरी पीढ़ी और समाज की सोच को बदलती है।

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष  कुसुम कंडवाल ने आरक्षण के लिए किए गए लंबे संघर्ष को याद करते हुए एक महत्वपूर्ण संस्मरण साझा किया। उन्होंने कहा:

“आज का यह दिन एक लंबे संघर्ष की जीत का प्रतीक है। मुझे याद है वह समय जब वर्ष 2007-08 में, मैं पांच हजार की संख्या में महिलाओं के साथ दिल्ली गई थी और हमने 33% राजनैतिक आरक्षण की पुरजोर मांग उठाई थी। उस समय देश की नारी शक्ति ने एकजुट होकर अपने अधिकारों की आवाज बुलंद की थी। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की दूरगामी सोच का ही परिणाम है कि आज वह सपना साकार हुआ है। आने वाले समय में पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक हमारी मातृशक्ति की गूंज गूंजेगी।

प्रधानमंत्री जी ने महिलाओं को केवल नीति का ‘लाभार्थी’ होने से मुक्त कर उन्हें ‘नीति निर्माता’ बनने तक का ऐतिहासिक मार्ग प्रशस्त किया है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय राज्यमंत्री भारत सरकार, आयोग की अध्यक्ष एवं अन्य अतिथियों द्वारा समाज के विभिन्न क्षेत्रों में मील का पत्थर स्थापित करने वाली निम्नलिखित 11 महिलाओं को सम्मानित किया गया।

जिनमें  माधवी बर्थवाल: पद्मश्री, लोक संस्कृति एवं पारंपरिक कला संरक्षण के क्षेत्र में,

अनुराधा मल्ला: ओनर एवं प्रिंसिपल, ओलंपस हाई स्कूल,

ममता रावत: एम.डी., ज्योमा सॉल्यूशंस (स्टार्टअप एवं उद्यमिता),  किरण भट्ट: हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में विशिष्ट योगदान,

पारुल अग्रवाल: कार्यकारी निदेशक BNI एवं कम्युनिटी हेड, श्रीमती प्रिया गुलाटी: निदेशक, बैगिट कंसल्टिंग ग्रुप एवं संस्थापक, तेजस्विनी ट्रस्ट,

दीपा बाछेती: क्लस्टर हेड, बाला जी क्लस्टर, सहसपुर।

एडवोकेट रितु गुजराल: POCSO एवं LGBTQ अधिकारों हेतु समर्पित अधिवक्ता।

डॉ. रामा गोयल: प्रख्यात समाज सेविका।

निधि गोयल: सीएम (CC & LPG सेल्स), IOCL।

डॉ गीता जैन: प्राचार्य, दून मेडिकल कॉलेज।

कार्यक्रम का कुशल संचालन  दीप्ति रावत द्वारा किया गया। इस अवसर पर विधायक  सविता कपूर, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष  कुसुम कंडवाल, बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना, पद्मश्री माधुरी बर्थवाल, दीप्ति रावत,  रूचि भट्ट सहित, राज्यमंत्री मधु भट्ट, राज्य मंत्री चारु ठाकुर, महिला आयोग की सदस्य, सचिव महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास चंद्रेश यादव, निदेशक आईसीडीएस बंशी लाल राणा, सदस्य सचिव महिला आयोग उर्वशी चौहान बड़ी संख्या में मातृशक्ति उपस्थित रहीं।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारे चैनल में आपका स्वागत है, खबरों व विज्ञापन के लिए संपर्क करें -+91 8859895608
error: Content is protected !!