विश्व कप महिला क्रिकेट जीत की खुशी में परमार्थ गंगा तट पर जोश के साथ तिरंगा फहराया



 

मुनि की रेती (आशीष कुकरेती) भारत की महिला क्रिकेट टीम द्वारा विश्व कप की ऐतिहासिक जीत पर पूरे देश में उत्सव और आनंद का वातावरण है। भारतीय महिला क्रिकेट के स्वर्णिम अध्याय को रचने वाली इन बेटियों ने न सिर्फ ट्रॉफी जीती है, बल्कि भारत के 140 करोड़ लोगों के हृदय भी जीत लिये हैं।
इसी गौरवशाली क्षण को समर्पित, आज परमार्थ निकेतन के गंगा तट पर आयोजित विशेष गंगा आरती। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में राष्ट्रध्वज तिरंगा लहराया देश की इन वीरांगनाओं की विजयगाथा के जयघोष से संपूर्ण वातावरण गूँज उठा।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने इस शुभ अवसर पर संपूर्ण देशवासियों को बधाई देते हुए कहा भारत ने नारी शक्ति को सदैव ही चैम्पियन माना है। हमारे शास्त्रों कहते हैं यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवताः जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का वास होता है। आज भारत की बेटियों ने यह सिद्ध कर दिया कि संकल्प, समर्पण और आत्मविश्वास से किसी भी शिखर को छुआ जा सकता है।

स्वामी जी ने घोषणा की कि परमार्थ निकेतन भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सभी बेटियों को परमार्थ में आमंत्रित करेगा और उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गंगा तट से एक संदेश पूरे विश्व को जाना चाहिए कि भारत की नारी शक्ति केवल परम्पराओं की संरक्षिका ही नहीं, बल्कि विजय और नेतृत्व की अग्रदूत भी है।
2005 के दर्द से लेकर 2017 की जुझारूपन तक दशकों के संघर्ष की यह सफलता कहानी है। आज की तारीख भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में सदैव स्वर्णाक्षरों से लिखी जाएगी। यह हर उस बेटी की जीत है जिसने खिलौनों की जगह बल्ला उठाया, जिसने मैदान पर सपनों की नींव रखी, जिसने यह विश्वास जगाया कि हम भी विश्व विजेता बन सकते हैं।
स्वामी जी ने कहा यह विजय सिर्फ एक टीम की नहीं, हर उस माता-पिता की है जिन्होंने अपनी बेटियों के सपनों को पंख दिये, हर उस गुरु की है जिन्होंने बिना किसी भेदभाव के उन्हें आगे बढ़ाया और हर उस युवा बेटी की है जिसने दहलीज पार कर मैदान में कदम रखा। भारत की नारियों की यह जीत एक महाशक्ति के पुनरुत्थान का संदेश है। यह नारी सामर्थ्य, नारी शौर्य और नारी गौरव का शंखनाद।
परमार्थ निकेतन में आज की आरती विशेष रूप से भारतीय महिला क्रिकेट टीम की जीत को समर्पित की। “भारत माता की जय” के नारों से वातावरण गुंजायमान हो उठा। दीपों की रोशनी, तिरंगे का तेज और गंगा की लहरें यह दृश्य हर हृदय में रोमांच कर देने वाला था।
स्वामी जी ने कहा कि सभी ने एक स्वर में संकल्प लेना होगा कि भारत की हर बेटी अपने सपनों के साथ आगे बढ़ेगी और समाज उसका साथ देगा। शिक्षा, खेल, विज्ञान, तकनीक हर क्षेत्र में नारी के नेतृत्व का मार्ग और अधिक विस्तृत किया जाएगा।
स्वामी जी ने कहा भारत की नारियों की यह विश्व विजय न केवल खेल की सफलता है, बल्कि विश्व शांति, समता और समान अधिकारों का संदेश भी है। हमारी बेटियाँ हर मंच पर विश्व की प्रेरणा बनें यही प्रार्थना है।


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