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योग मेडिशियेशन ध्यान जीवन में आगे बढ़ने का आधार क्रिकेटर स्नेहा राणा



 

ऋषिकेश (आशीष कुकरेती) मुनि की रेती, अंतराष्ट्रीय योग महोत्सव पर आज भारतीय महिला आलराउंड क्रिकेटर स्नेहा राणा ने योग महोत्सव को अपना समर्थन देते हुये अपने पुरातन ओर नवीन अनुभवों से पूछे गए सवालों का जबाब वैवाकि से जबाब दिया।इस अवसर पर निगम के प्रबन्ध निदेशक प्रतीक जैन के पूछे गए सवाल ओर स्नेहा राणा के जबाब का साक्षत्कार की रिपोर्ट-

प्रतीक जैन- आप स्कूल में पढ़ते एवम भारतीय टीम का सदस्य बनने तक के सफर पर क्या कहना चाहेगी।

स्नेहा- स्कूल में पढ़ते हुए आम जन की तरह गली, मोहल्लों पर क्रिकेट खेलते रहे और जब अभिभावकों ने क्रिकेट के प्रति रुझान देखा तो देहरादून क्रिकेट अकादमी में 9 वर्ष में प्रशिक्षण दिलवाने का कार्य किया।इसमें परिवार का सहयोग और मेरी कड़ी मेहनत का परिणाम है।

प्रतीक- आप योग महोत्सव में स्पेशल गेस्ट है तो आपसे योग के बारे में जानना चाहेंगे।

स्नेहा- योग जीवन के अनुशासन का आधार है ।वर्ष 2016 में मेरी इन्जरी हुई और 1 साल क्रिकेट से बाहर रहना पड़ा ।समय कठिन जरूर था लेकिन योग, प्राणायाम ने हेल्प कर रिकवरी में मदद की।

प्रतीक-क्या आज भी योग करती है।

स्नेहा- मेरा हर दिन मेडिशियेशन ओर सूर्य नमस्कार क्रिया जारी रहती है।

प्रतीक-आपके अभिभावकों का सपोर्ट के बारे में आप क्या कहेंगी।

स्नेहा-गांव में संसाधनों की कमी और खेल के प्रति मेरी रुचि को देखकर मुझे अपने घर परिवार का पूरा सहयोग प्राप्त हुआ है।मै अपने को खुश किस्मत समझती हूँ कि आज उनके प्रयास से मै भारतीय महिला क्रिकेटर आलराउंड खिलाड़ी बनी हूँ।खुशकिस्मती है कि मुझे ऐसे घर परिवार में पैदा होने का गर्व है।

प्रतीक-खेल को बढ़ावा देने के लिये आप क्या सन्देश देना चाहती है।

स्नेहा- मेरा उत्तराखण्ड के समस्त अभिभावकों से निवेदन रहेगा कि खेल को बढ़ावा देने के लिये बच्चों को मौका दे।उसकी अभिरुचि के अनुसार उसको खेलने के अवसर प्रदान करे।खेल को एक्स्ट्रा ना कहकर जीवन का प्रमुख अंग बनाये।

प्रतीक- फील्ड में आपको शान्ति या विद्रोही बनना पसन्द है।

स्नेहा-फील्ड में तो शान्ति से ही आप खेलभावना के अनुरूप खेलना पसंद है लेकिन साथ ही टीम की जीत के लिये विद्रोही भावना भी जरूरी है। लड़ने की आदत है जो विद्रोही बनाती है।ये नाम मेरी मित्र ने दिया है जिसका टैटू बनवाया है।

प्रतीक- खेल के बारे में कुछ कहना चाहेंगी।

स्नेहा-खेल के दौरान उतार चढ़ाव चलतारहता है मुझे कम बैंक करने में 5 साल का समय लगा है।खेल में मेहनत, अनुशासन की आवश्यकता होती है।यही कारण है कि आज देश की क्रिकेटर टीम में नीली जर्सी ओर तिरँगे होना गर्व की बात है।

प्रतीक-वर्ड कप जीतकर कैसा महसूस किया।

स्नेहा-खेलना शुरू किया और टीम की मेहनत,त्याग के आधार पर वर्ड कप जीता।इससे बड़ी खुशी और क्या हो सकती है।

प्रतीक-थीम सांग के बारे में कुछ कहना चाहेंगे।

स्नेहा-टीम ने 4 साल पहले थीम सांग के बारे में सोचा ओर फिर इसकी कामयाबी को सार्थक कर दिखाया।

प्रतीक-टीम के बारे में बताएंगी की ड्रेसिंग रूम में क्या चलता है।

स्नेहा- एकता में दम होता है और आने अनुभव किया कि टीम केआधार पर हम सफलता पाने में कारगर साबित हुए।ड्रैसिंग रूम का माहौल खुशनुमा रहे ।खिलाड़ी मानसिक अवसाद का शिकार ना हो ऐसा सबका प्रयास रहता है।

प्रतीक -आप मेंटल बेलेंस कैसे रखती है।

स्नेहा-एक खिलाड़ी को सदैव अपने खेल के प्रति समर्पित रहना चाहिए, प्रैक्टिस सदैव सतत प्रक्रिया है इसमें हमारे ट्रेनर हमे तकनीकी ज्ञान देते है।

प्रतीक-खेल में क्या करना पसंद है।

स्नेहा-मेरा बॉलिंग ओर बैटिंग करना माइंड सेट रहता है। बेहत्तर खेल से जीत प्राप्त करे इस सोच से मैदान में जाते है।

प्रतीक-आप पुरातन ओर नवीन अपने अनुभव को साझा करँगी।

स्नेहा- आज खेल के संसाधनों और टैलेंट की कमी नही है।आज ग्राउंड है,स्टेडियम है।खेल प्रतिदिन जीवन का अंग हो।एक्स्ट्रा आडनेरी नही बल्कि नित प्रयोग का हिस्सा बने।पहले बहुत कमी का दौर रहा है।

प्रतीक- आप कोई सन्देश देना चाहेंगी।

स्नेहा-उत्तराखण्ड के लोग बहादुर, स्ट्रांग ओर मेहनती होते है।उन्होंने जो ठाना है उसको पाना उनका लक्ष्य रहता है बस जीवन का लक्ष्य साध ले।होसलो की उड़ान अवश्य मिलेगी।

योग महोत्सव में आये योग साधकों के सवालों का जबाब देकर उन्होंने कहा कि आफ सीजन में हम ज्यादा मेहनत करते है और अपने शरीर को फिजिकल वर्क को बेहत्तर करते है,एवरी डे प्रैक्टिस करने का प्रयास करते है।बेहत्तर सोच के आधार पर खुश रहे,स्वस्थ्य रहे और मस्त रहे।आपके लिए जो सही है उसको अवश्य कीजिये। इस अवसर पर निगम एम ड़ी ने स्नेहा राणा को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।


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