78वें सेना दिवस पर परमार्थ निकेतन में विश्व शान्ति, राष्ट्र कल्याण और वीर सैनिकों के सम्मान हेतु पूजा एवं अभिषेक का आयोजन



 


ऋषिकेश आशीष कुकरेती 15 जनवरी परमार्थ निकेतन में 78वें सेना दिवस एवं मकर संक्रान्ति के शुभ अवसर पर वेद मंत्रोच्चार, विशेष पूजा-अर्चना, शिवाभिषेक एवं विश्व शान्ति प्रार्थना का आयोजन किया गया। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष  स्वामी चिदानन्द सरस्वती, परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों, पुरोहितों तथा देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने भारत माता की सुख-समृद्धि, सीमाओं की सुरक्षा और विश्व कल्याण हेतु विशेष पूजा, प्रार्थना और अभिषेक किया।

राष्ट्र की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा में निरंतर समर्पित भारतीय सेना के सभी वीर जवानों को सेना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुये पूज्य स्वामी जी ने कहा कि अद्भुत साहस, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के साथ हमारे सैनिक देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए हर नागरिक को सुरक्षा, विश्वास और स्वाभिमान का संबल प्रदान करते हैं।

वेद मंत्रों की दिव्य गूंज के साथ शिवाभिषेक करते हुए  स्वामी चिदानन्द सरस्वती  ने कहा कि भारतीय सेना केवल हमारी सीमाओं की रक्षा नहीं करती, बल्कि वह भारत की आत्मा, अस्मिता और स्वाभिमान की प्रहरी है। उन्होंने कहा, हमारे वीर सैनिक वेतन के लिए नहीं, वतन के लिए जीते हैं। उनका जीवन त्याग, तप और राष्ट्रभक्ति की जीवंत मिसाल है।

स्वामी  ने कहा कि मकर संक्रान्ति सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व है, जो अंधकार से प्रकाश की ओर, नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर और आत्मकेन्द्रित जीवन से राष्ट्र और समाज के प्रति समर्पित जीवन की ओर अग्रसर होने का संदेश देता है। इन्हीं भावनाओं के साथ आज की प्रार्थना विश्व शान्ति, भारत की अखंडता, समृद्धि और सैनिकों की सुरक्षा हेतु समर्पित की।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती  ने कहा कि, “बर्फीली चोटियों से लेकर तपते मरुस्थल तक, समुद्र की गहराइयों से लेकर आकाश की ऊँचाइयों तक, हमारे सैनिक हर क्षण राष्ट्र के लिए अडिग खड़े रहते हैं। वे न केवल हमारे भूभाग की रक्षा करते हैं, बल्कि हमारी स्वतंत्रता, शान्ति और सम्मान की भी रक्षा करते हैं।”

उन्होंने कहा कि भारतीय सेना केवल एक सैन्य शक्ति नहीं, बल्कि भारत की मर्यादा, संकल्प और स्वाभिमान की जीवंत प्रतीक है। उनका अनुशासन हमें जीवन में संयम सिखाता है, उनका साहस हमें निर्भय बनाता है और उनका त्याग हमें राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध कराता है। स्वामी  ने युवाओं से आह्वान किया कि वे सैनिकों के जीवन से प्रेरणा लें और अपने भीतर राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और सेवा का भाव विकसित करें।
स्वामी  ने कहा कि वे भारत माता के अमर सपूत, जो राष्ट्र की रक्षा करते हुए अपने घर वापस नहीं लौट सके, उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि। उनका बलिदान केवल इतिहास नहीं, हमारी सांसों में बसा हुआ स्वाभिमान है। उन्होंने अपने आज को राष्ट्र के कल के लिए समर्पित कर दिया। उनकी वीरता, त्याग और राष्ट्रभक्ति आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का शाश्वत स्रोत है। हम उनके परिवारों के प्रति कृतज्ञ हैं, जिनकी गोद ने ऐसे वीरों को जन्म दिया। उनका त्याग व्यर्थ नहीं जाएगा, भारत सदैव उनका ऋणी रहेगा। जय हिन्द। जय हिन्द की सेना।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हमारे चैनल में आपका स्वागत है, खबरों व विज्ञापन के लिए संपर्क करें -+91 8859895608
error: Content is protected !!