राम कथा मन बुद्धि और हृदय को पवित्र करने का दिव्य माध्यम स्वामी चिदानंद सरस्वती



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ऋषिकेश (आशीष कुकरेती) 25 नवम्बर रघुवंशपुरम आश्रम, केशवप्रिया गौशाला, केलावा, जोधपुर में आयोजित श्रीराम कथा का वातावरण आज अत्यंत दिव्य, प्रेरणादायी और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा। संत  मुरलीधर महाराज के मुख से हो रही राम कथा में आज परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती  का पावन सान्निध्य और आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती  ने अपने आशीर्वचन में कहा कि श्रीराम कथा मन, बुद्धि और हृदय को पवित्र करने का दिव्य माध्यम है। कथा केवल सुनने की नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शन करने वाली आध्यात्मिक दिशा है। उन्होंने कहा “जो सनातन को मिटाने का कार्य करेगा, वह स्वयं ही मिट जाएगा। सनातन कभी विनाश की बात नहीं करता; सनातन तो शांति, समरसता, प्रेम और सद्भाव का मार्ग दिखाता है। सनातन है तो भारत है, और भारत है क्योंकि उसकी आत्मा सनातन है।”
स्वामी  ने कहा कि आज की दुनिया में शक्ति, सम्पत्ति और वैभव बढ़ रहे हैं, परन्तु शांति, संतोष और संयम घटते जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में राम कथा समाज में आध्यात्मिक संतुलन की पुनर्स्थापना करती है। उन्होंने कहा कि भगवान राम का जीवन मर्यादा, करुणा, सत्य और सेवा का अनन्त स्रोत है। जो श्रीराम को हृदय में धारण कर लेते हैं, उसके जीवन में मार्ग, मर्यादा और मधुरता स्वयं प्रवाहित होने लगती है।

स्वामी  ने आज  गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वें शहीदी दिवस पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा “श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी का बलिदान मानवता के इतिहास में अद्वितीय है। उन्होंने किसी धर्म विशेष के लिए नहीं, बल्कि ‘धर्म की स्वतंत्रता’ के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। उनका साहस, सत्य, निर्भीकता और करुणा आज भी हमें प्रेरित करती है। उनका बलिदान सदैव हमारे समाज को प्रकाशमान करता रहेगा।”
आज का दिन विवाह पंचमी का पावन पर्व भी है। इस अवसर पर स्वामी जी ने सभी को मंगलकामनाएँ देते हुए कहा कि भगवान श्रीराम और माता सीता का दिव्य दाम्पत्य धर्म, समर्पण, संतुलन और पवित्रता का सर्वाेच्च आदर्श है। वैवाहिक जीवन में जब परस्पर सम्मान, विश्वास और मर्यादा होती है, तब परिवार सुखमय बनता है और समाज भी स्वस्थ होता है। विवाह पंचमी हमें इस दिव्य संदेश को हृदय में बसाने की प्रेरणा देती है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती  ने  राम जन्मभूमि मंदिर अयोध्या के शिखर पर ध्वजारोहण के ऐतिहासिक आयोजन पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा अयोध्या में फहराया गया यह पवित्र भगवा रंग का ध्वज केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक अस्मिता, आध्यात्मिक चेतना और सनातन मूल्यों की विजय का प्रतीक है। यह ध्वज धर्म की अडिगता, सत्य की अप्रतिम शक्ति और समर्पण की पुण्य परंपरा का उद्घोष है।”

स्वामी  ने कहा कि आज पूरे देश में एक नई आध्यात्मिक लहर उठ रही है। जन-जन में श्रीराम के प्रति प्रेम और सनातन के प्रति गौरव जागृत हो रहा है। यह केवल धार्मिक भाव नहीं, बल्कि राष्ट्र के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का संकेत है।
रघुवंशपुरम आश्रम में आयोजित यह दिव्य कथा कार्यक्रम अध्यात्म, भक्ति और संस्कृति का अतुलनीय संगम है। गौशाला का शांत वातावरण, संतों का सान्निध्य और कथा का दिव्य रस सभी के हृदयों को स्पंदित कर रहा है।
स्वामी जी ने सभी को जीवन में करुणा, सेवा, सद्भाव, गौसंरक्षण और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।


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