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आचार्य बालकृष्ण के आगमन से परमार्थ निकेतन में योग और आयुर्वेद का अद्भुत संगम



ऋषिकेश आशीष कुकरेती 09 मार्च अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का विधिवत उद्घाटन आचार्य बाल कृष्ण जी, पतंजलि योग पीठ के पावन सान्निध्य में हुआ।

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के प्रेरणास्रोत आचार्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती , अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशक साध्वी भगवती सरस्वती , प्रसिद्ध ड्रम वादक शिवमणि जी, प्रसिद्ध गायिका रूना रिजव़ी  और विश्व के 80 से अधिक देशों से आये योगजिज्ञासुओं और योग की अनेक विधाओं के योगाचार्यों ने मिलकर विश्व शान्ति हेतु प्रार्थना की।

आचार्य बालकृष्ण के पावन आगमन से परमार्थ निकेतन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का वातावरण और भी प्रेरणादायक बन गया। उन्होंने योग और आयुर्वेद की प्राचीन भारतीय परंपरा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए इन दोनों का संतुलित समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उनके प्रेरणादायक विचारों ने देश-विदेश से आए योग साधकों को भारतीय ज्ञान परंपरा की गहराई से परिचित कराया।

इंटरनेशनल योग फेस्टिवल के प्रथम दिन गंगा जी आरती में विश्वप्रसिद्ध ड्रम वादक शिवमणि ने अपनी ऊर्जावान तालों और रूना रिजव़ी जी ने पूरे वातावरण को ऊँ नमः शिवाय के मंत्र से गुंजायमान कर दिया।

देश-विदेश से आए योग साधक उनकी लय और संगीत पर झूम उठे। ड्रम की जीवंत ध्वनियों ने पूरे परिसर में उत्साह और आनंद का अद्भुत वातावरण से युक्त कर दिया। योग साधकों ने संगीत और योग के इस अनोखे संगम का भरपूर आनंद लिया। आज की गंगा आरती दिव्य ऊर्जा, लय और आध्यात्मिक आनंद का ऐसा अनुभव बनी जिसने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरे वातावरण को उल्लास से भर दिया।

आचार्य बालकृष्ण  ने योग जिज्ञासुओं को संबोधित करते हुये कहा कि आज दुनिया में अशान्ति दिखाई देती है, जबकि हम में से कोई भी अशान्ति नहीं चाहता। फिर भी किसी न किसी कारण से संसार में अशान्ति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि अशान्ति से शान्ति कभी उत्पन्न नहीं हो सकती, इसलिए ऐसे महोत्सव अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जो अशान्ति के बीच शान्ति स्थापित करने का प्रयास करते हैं।

उन्होंने कहा कि इस पावन अवसर पर आप सभी एक साथ एकत्रित हुए हैं, यहाँ ईरान भी है, इजराइल भी है और यूक्रेन और रशिया भी है। अलग-अलग देशों, संस्कृतियों और विचारों के लोग यहाँ एक मंच पर जुड़े हैं। यही योग की वास्तविक शक्ति है, जो दिलों को जोड़ती है और सभी भावनाओं को एक सूत्र में पिरोने का सामर्थ्य रखती है।

उन्होंने कहा कि यदि हमें जीवन के सत्य को समझना है तो हमें योगी बनना होगा। यहाँ आना माँ गंगा की कृपा और व्यवस्था है। इस जीवन को शुद्ध और पवित्र बनाना हमारे अपने हाथ में है। आप सभी सही मार्ग के पथिक हैं, इसलिए बिना विचलित हुए और बिना घबराए योग मार्ग का निरंतर अनुसरण करें। उन्होंने कहा कि यह एक दिव्य और भव्य अवसर है इसे खोना नहीं।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती  ने आचार्य बालकृष्ण जी को रूद्राक्ष का दिव्य पौधा भेंट कर इस पावन अवसर पर उनका अभिनन्दन किया।


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