


ऋषिकेश (आशीष कुकरेती ) 4 सितम्बर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व के स्वागत के लिए परमार्थ निकेतन में तैयारियाँ श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ चल रही हैं। आश्रम परिसर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर विशेष तैयारियां हो रही है।
परमार्थ निकेतन की ओर से समस्त देशवासियों एवं विश्वभर के श्रद्धालुओं को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ। प्रार्थना है कि भगवान श्रीकृष्ण का दिव्य प्रेम प्रत्येक हृदय में प्रकट हो, जीवन में धर्म का प्रकाश हो, कर्मों में निष्कामता हो और समस्त विश्व में शांति, सद्भाव एवं करुणा का विस्तार हो।
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म कारागार में हुआ, परंतु उनका जीवन यह संदेश देता है कि परमात्मा का प्रकाश परिस्थितियों का मोहताज नहीं होता। अंधकार कितना भी गहरा हो, सत्य का अवतरण संभव है। जन्माष्टमी हमें स्मरण कराती है कि जब मनुष्य अपने भीतर के भय, मोह, अहंकार और अज्ञान के बंधनोंको पार करता है, तभी उसके जीवन में कृष्ण का प्रकाश प्रकट होता है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने अपने संदेश में कहा कि श्री कृष्ण वह चेतना हैं जो जीवन के प्रत्येक आयाम को प्रेम, ज्ञान और आनंद से पूर्ण करती है। श्री कृष्ण अर्थात् वात्सल्य, प्रकृति और गौ-संस्कृति के संरक्षक हैं, प्रेम और माधुर्य के प्रतीक हैं, जीवन के मार्गदर्शक हैं। श्री कृष्ण राधा के प्रेम में माधुर्य हैं, सुदामा की मित्रता में आत्मीयता हैं, द्रौपदी की पुकार में करुणा हैं और अर्जुन के संशय में ज्ञान हैं।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण एक ऐसे अवतार हैं जो सर्वांगीणता के दर्शन कराते हैं। उनके जीवन में भक्ति है, ज्ञान है, कर्म है, योग है, प्रेम है, नीति है, करुणा है, नेतृत्व है और लोककल्याण की भावना है। वे हमें संदेश देते हैं कि आध्यात्मिकता जीवन से अलग कोई वस्तु नहीं, बल्कि जीवन के प्रत्येक कर्म में परमात्मा का अनुभव करने की कला है।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव इसी दिव्य संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का अवसर है। यह पर्व हमें प्रेरणा देता है कि हम अपने जीवन को प्रेम, सेवा, साधना और सद्भाव से युक्त कर समाज और विश्व के कल्याण के लिए समर्पित हो

