

ऋषिकेश (आशीष कुकरेती) 19 जनवरी9 सनातन धर्म विकास परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष एवं बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड के प्रमुख संत नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में तथाकथित शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा बवाल किए जाने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर आरोप लगाने की कड़े शब्दों में निन्दा की है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित ज्योतिष पीठ का खुला अपमान कर रहे हैं जबकि हकीकत यह है कि वर्तमान में भी ज्योतिषपीठ का मामला माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय में विचाराधीन है फिर कैसे वो ज्योतिष्पीठाधीश्वर की हैसियत से पालकी पर सवार होकर स्नान करने जा रहे थे।
स्वामी रसिक महाराज ने बताया कि आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा रचित मठाम्नाय (मठाम्नाय महानुशासन) में मुख्य रूप से चारों मठों की स्थापना, उनके नियम, आचार्य, संप्रदाय, और क्षेत्र के विवरण हैं। उपलब्ध ऐतिहासिक और पारंपरिक विवरणों के अनुसार पालकी पर स्नान का प्रत्यक्ष उल्लेख: ‘मठाम्नाय’ में स्पष्ट रूप से यह नहीं लिखा है कि शंकराचार्य के लिए पालकी पर जाकर स्नान करने का विधान है। परंपरा: शंकराचार्यों के लिए पालकी (रथ या विशेष सवारी) का उपयोग एक परंपरागत “राजोपचार” (राजा के समान सम्मान) के रूप में किया जाता है, जो सदियों से मठों में प्रचलित है, न कि किसी प्राचीन लिखित नियम के तहत अनिवार्य, जैसा कि हाल के विवाद (2026 मौनी अमावस्या) से जुड़े परिणामों में संकेत मिला है।
दशानामी सन्यासी नियम आदि शंकराचार्य ने सनातन धर्म के प्रचार के लिए मठों की स्थापना की थी और उन सन्यासियों के लिए नियम (मठाम्नाय) बनाए थे, जो मुख्य रूप से ज्ञान और त्याग पर आधारित हैं।
निष्कर्षत पालकी पर जाकर स्नान करना उनकी स्थापित परंपरा और सम्मान का हिस्सा माना जाता है, लेकिन यह ‘मठाम्नाय’ के लिखित नियमों में उल्लिखित नहीं है।

