


ऋषिकेश / देहरादून महिला सरोज बाला रावत ब्लैकमेलिंग तथा एससी एसटी वर्ग के लिए सोशल मीडिया में गाली गलौज करने के अपराध में जेल जा चुकी है साथ ही उक्त महिला पर दो मुकदमे पंजीकृत है और दोनों मुकदमे में न्यायालय ने संज्ञान ले लिया है। गौरतलब है कि उक्त महिला की पैसे मांगने और ब्लैकमेलिंग वाली ऑडियो भी सोशल मीडिया में बहुत वायरल हुए थी ।
जेल जाने और दोनों मुकदमों में संज्ञान होने के बाद पुलिस अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर दबाव बनाने के आशय से सरोज बाला रावत द्वारा दो सीओ रैंक के पुलिस अधिकारियों तथा सात अन्य पुलिसकर्मियों पर अनेक प्रकार के आरोप लगाए गए। 12 से अधिक उच्चस्थ विस्तृत जांचों के बाद समस्त आरोप निराधार पाए गए। उक्त मामले को महिला सरोज बाला रावत द्वारा धारा 175 के अंतर्गत जब कोर्ट में लाया गया तो कोर्ट ने भी इसे खारिज कर दिया और कोर्ट ने अपने दिए गए विस्तृत निर्णय में तल्ख टिप्पणी करते हुए अपने आदेश में कहा कि “,सरोज बाला रावत द्वारा उसके विरुद्ध आपराधिक मुकदमा दर्ज होने के उपरांत सोच समझकर विपक्षीगण पर दबाव बनाने के आशय से तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत कर गलत प्रार्थना पत्र दिए गए हैं “,इन झूठे प्रार्थना पत्रों में लगाये गए झूठे आरोपों का उद्देश्य दबाव डालना है,ताकि स्वयं के मुकदमे कमजोर हो सके और। इसके साथ ही कोर्ट ने इसके समस्त आरोपों को निरस्त कर दिया है ।
उक्त महिला द्वारा अब पुलिस महकमे और अधिकारियों पर दबाव बनाने के आशय से या इस आशय से कि इस पर मुकदमे समाप्त हो जाए इस आशय से जगह-जगह कोर्ट के आदेश से निरस्त झूठे प्रार्थना पत्रों को सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित किया जा रहा है ताकि विपक्षीगणों की छवि धूमिल हो सके। इस पर हम लोग कार्रवाई करेंगे और उक्त महिला सरोज बाला रावत को मानहानि का नोटिस प्रेषित करेंगे।

