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रोगियों का इलाज करने वाले चिकित्सकों सहित आम लोगों को अंगदान के प्रति जन-जागरूकता लानी होगी



ऋषिकेश (आशीष कुकरेती)  24 जनवरी अंगदान प्रक्रिया में धर्म आड़े नहीं आता है और ब्रेन डेड हो चुके व्यक्ति के अंगों से हम किसी भी अन्य धर्म व जाति के जरूरतमंद व्यक्ति का जीवन बचा सकते हैं। इसके लिए रोगियों का इलाज करने वाले चिकित्सकों सहित आम लोगों को अंगदान के प्रति जन-जागरूकता लानी होगी।

एम्स ऋषिकेश के सभागार में शनिवार को सार्वजनिक व्याख्यान कार्यक्रम के दौरान दिल्ली एम्स के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डाॅ. दीपक गुप्ता ने उक्त व्याख्यान दिया। उन्होंने ब्रेन डेथ की स्थिति के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि कोमा में चले जाने की स्थिति में व्यक्ति जीवित रहता है और ठीक भी हो सकता है लेकिन ब्रेन डेथ एक मृत अवस्था होती है। ब्रेन डेथ अवस्था से व्यक्ति वापिस जीवित नहीं हो सकता है। इसलिए यदि परिजन ऐसे व्यक्ति के अंगदान करवा दें तो यह न केवल महा पुण्य है अपितु इससे कई लोगों का जीवन भी बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अंगदान के मामले में हमारा देश 68वीं रैंक में है जबकि सबसे पहले अपनी हड्डियों का दान करने वाले महर्षि दधीचि भारत भूमि पर ही जन्मे थे। सभागार में बड़ी संख्या में मौजूद संस्थान के चिकित्सकों सहित आम लोगों को संबोधित करते हुए डाॅ. गुप्ता ने कार्डियक डेथ और ब्रेन डेथ के बारे में बारीकी से जानकारी दी। कहा कि देश में प्रति वर्ष डेढ़ लाख लोगों की सड़क दुर्घटना में और 50 हजार से अधिक लोगों की मृत्यु धूम्रपान के कारणों से हो जाती है। यदि इस प्रकार के लोगों की मृत्यु होने से पहले इलाज करने वाले चिकित्सक ब्रेन डेथ स्थिति की जांच कर लें और परिजनों को अंगदान के प्रति जागरूक कर अंगदान करवा दें तो प्रतिवर्ष देश के हजारों लोगों का जीवन बच सकता है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष इस प्रकार के मामलों में हुई 5 लाख मौतों में से केवल 1128 लोगों को परिजनों को ही अंगदान के प्रति प्रेरित किया जा सका। कहा कि इसकी जागरूकता के लिए सामूहिक कदम उठाने होंगे।

संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने मेडिकल छात्रों से आह्वान किया कि वो अंगदान की महत्ता समझ कर लोगों में अंगदान के प्रति जागरूकता लाने के लिए संदेश संवाहक के तौर पर भूमिका निभाएं। उन्होंने बताया कि एम्स में काॅर्निया बैंक स्थापित है और नेत्रदान करने वाले लोगों की वजह से संस्थान सैकड़ों अन्य जरूरतमंदों में काॅर्निया प्रत्यारोपित कर उनकी आंखों की रोशनी लौटा चुका है। प्रो. मीनू सिंह ने आम लोगों से अपील की कि वो समाज में अंगदान के प्रति जन-जागरूकता को बढ़ावा दें। कार्यक्रम में डीन एकेडेमिक प्रो. सौरभ वार्ष्णेय, ऋषिकेश मेयर शम्भू पासवान, विभिन्न विभागों के फेकल्टी सदस्य, मेडिकल के छात्र और बड़ी संख्या में सामाजिक क्षेत्र के लोग मौजूद रहे।


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