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महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर परमार्थ निकेतन मे भावभीनी श्रद्धाजंलि दी गई



ऋषिकेश, 19 जनवरी। परमार्थ निकेतन के महानायक, “मेवाड़-मुकुट मणि” महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने भावभीनी श्रद्धाजंलि अर्पित करते हुये आज की परमार्थ गंगा आरती उनकी सेवा, साधना व राष्ट्रभक्ति को समर्पित की। वे राष्ट्र की आत्मा, संस्कृति और अस्मिता के रक्षक थे।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि महाराणा प्रताप ने अपने जीवन की हर सुविधा, हर सुख और हर आराम को त्याग कर अपना सर्वस्व भारत माता को समर्पित कर दिया परन्तु मातृभूमि की स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं किया।
हल्दीघाटी का युद्ध महाराणा प्रताप के जीवन की सबसे गौरवपूर्ण गाथाओं में से एक है। यह युद्ध केवल तलवारों का संघर्ष नहीं था, बल्कि स्वतंत्रता और पराधीनता के बीच का निर्णायक संग्राम था। सीमित संसाधनों और विषम परिस्थितियों के बावजूद महाराणा प्रताप ने अद्भुत वीरता का परिचय दिया। उनका प्रिय अश्व चेतक आज भी त्याग, निष्ठा और बलिदान का प्रतीक है, जिसने घायल अवस्था में भी अपने स्वामी को सुरक्षित स्थान तक पहुँचाया।
महाराणा प्रताप का संघर्ष केवल युद्धभूमि तक सीमित नहीं था। उन्होंने वर्षों तक जंगलों, पहाड़ों और कठिन परिस्थितियों में जीवन व्यतीत किया। परिवार के साथ घास की रोटियाँ खाकर भी उन्होंने कभी आत्मगौरव को झुकने नहीं दिया। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि लक्ष्य पवित्र और संकल्प अडिग हो, तो इतिहास स्वयं मार्ग बना देता है।
“महाराणा प्रताप, राष्ट्र की आत्मा हैं। उन्होंने संदेश दिया कि जब आत्मसम्मान जाग्रत होता है, तब कोई शक्ति हमें पराजित नहीं कर सकती। महाराणा प्रताप ने पूरा जीवन भारतीय संस्कृति, परंपरा और स्वाधीन चेतना की रक्षा भी की।
स्वामी  ने कहा कि भारत की पावन धरती ने ऐसे अनेक महापुरुषों को जन्म दिया है, जिनके जीवन और विचार आज भी राष्ट्र को दिशा देते हैं। ये महापुरुष इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे भारत की चेतना, संस्कृति और आत्मा में आज भी जीवित हैं। उनके त्याग, तप, सेवा और साहस ने भारत को न केवल पहचान दी, बल्कि उसे विश्व के पटल पर गौरवपूर्ण स्थान भी दिलाया।
स्वामी  ने कहा कि आज की नई पीढ़ी के लिए महाराणा प्रताप एक जीवंत प्रेरणा हैं। उनके त्याग, साहस और देशभक्ति से युवाओं को संदेश प्राप्त होता है कि अपने राष्ट्र, संस्कृति और मूल्यों के प्रति निष्ठा ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। यदि युवा पीढ़ी उनके आदर्शों को अपनाए, तो भारत का भविष्य और भी उज्ज्वल, सशक्त और स्वाभिमानी बन सकता है। महाराणा प्रताप का जीवन हमें संदेश देता है कि जब उद्देश्य पवित्र हो, तब संघर्ष भी गौरव बन जाता है।


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