


ऋषिकेश, 26 अक्टूबर महा योग ध्यान कुंभ 9.0 के चौथे दिन इस्कॉन गवर्निंग बॉडी के सदस्य, गोवर्धन इको विलेज के निदेशक एवं प्रख्यात आध्यात्मिक वक्ता गौरंग दास प्रभु ने आधुनिक जीवन में बढ़ते मानसिक तनाव, सोशल मीडिया की लत और पारिवारिक संबंधों में आ रही चुनौतियों पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि भौतिक सुख-सुविधाओं और आर्थिक प्रगति के बावजूद वास्तविक आंतरिक शांति के लिए भगवद्गीता के ज्ञान और सनातन धर्म के सिद्धांतों से जुड़ना आवश्यक है।
शरद पूर्णिमा ध्यान के मंच से PMC Hindi एवं पिरामिड स्पिरिचुअल सोसाइटीज मूवमेंट (PSSM) की ओर से अंतरदर्शन (Antar Darshan) इनर वर्क रिट्रीट सीरीज-2027 की तिथियों की भी घोषणा की गई। इसका उद्देश्य आत्मचिंतन, भावनात्मक अवरोधों और मानसिक तनाव को समझते हुए प्रतिभागियों को आंतरिक परिवर्तन एवं आत्म-साक्षात्कार की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करना है।
सांसारिक जिम्मेदारियों के साथ आध्यात्मिक जुड़ाव जरूरी
गौरंग दास प्रभु ने कहा कि मनुष्य शरीर, जीवनसाथी, संतान, घर, वाहन, धन, सामाजिक प्रतिष्ठा और करियर जैसी सांसारिक जिम्मेदारियों में उलझा रहता है। इन दायित्वों के साथ आत्मा के परमात्मा से शाश्वत संबंध को समझना भी आवश्यक है।
उन्होंने दिन की शुरुआत प्रार्थना, ध्यान और भगवद्गीता के अध्ययन से करने का सुझाव दिया। उनके अनुसार इससे व्यक्ति को रोजमर्रा की चुनौतियों और मानसिक द्वंद्व का सामना करने में सहायता मिल सकती है।
तुलना और सोशल मीडिया से बढ़ती मानसिक चुनौतियां
युवाओं में बढ़ते तनाव और पारिवारिक संबंधों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि अपेक्षाओं और वास्तविकता के बीच का अंतर मानसिक तनाव का प्रमुख कारण बन सकता है। बच्चों की दूसरों से तुलना करना, लगातार शिकायत और आलोचना करना उनके आत्मविश्वास तथा मानसिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लाइक्स और फॉलोअर्स की होड़ को भी युवाओं के बीच अकेलेपन और असंतोष से जुड़ी चुनौती बताया। उन्होंने परिवारों से बच्चों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने और उनकी भावनाओं को समझने पर जोर दिया।
भोग के बजाय योग से जुड़ने का आह्वान
भगवद्गीता में वर्णित कर्म योग, ज्ञान योग, अष्टांग योग और भक्ति योग की चर्चा करते हुए गौरंग दास प्रभु ने भौतिक सुखों की अंधी दौड़ के बजाय आध्यात्मिक जुड़ाव और संतुलित जीवन पर जोर दिया। उन्होंने परिवारों से सप्ताह में कम से कम एक दिन साथ बैठकर भोजन करने तथा आपस में विचार साझा करने का आग्रह किया, ताकि पारिवारिक संवाद और आत्मीयता मजबूत हो सके।
ध्यान और पिरामिड विज्ञान पर भी चर्चा
कार्यक्रम में डॉ. सौरभ रंजन और शंपा मुखर्जी ने पंचकोश, मानव चेतना के विभिन्न स्तरों तथा ध्यान के माध्यम से शारीरिक और मानसिक कल्याण के विषय पर विचार रखे। वहीं पिरामिड विशेषज्ञ सतीश अग्रवाल और किशोर जी ने पिरामिड विज्ञान तथा सामाजिक रूपांतरण में इसकी भूमिका पर अपने विचार साझा किए।
सत्र के समापन पर पूर्व सीबीआई निदेशक डॉ. डी.आर. कार्तिकेयन सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने गौरंग दास प्रभु के संबोधन की सराहना की।
तीन चरणों में होगा अंतरदर्शन इनर वर्क रिट्रीट
महा योग ध्यान कुंभ 9.0 के दौरान घोषित अंतरदर्शन इनर वर्क रिट्रीट सीरीज के तीन चरण वर्ष 2027 में देश के विभिन्न आध्यात्मिक स्थलों पर आयोजित किए जाएंगे।
घोषित कार्यक्रम के अनुसार—
पहला चरण: 8 से 11 जनवरी 2027 — वाराणसी (काशी)
दूसरा चरण: 15 से 19 जुलाई 2027 — त्र्यंबकेश्वर, नासिक (महाराष्ट्र)
– तीसरा चरण: 3 से 6 दिसंबर 2027 — अंबाजी (गुजरात)
रिट्रीट का उद्देश्य प्रतिभागियों को अपने आंतरिक व्यवहार, भावनात्मक अवरोधों और मानसिक तनाव को समझने तथा आत्मचिंतन के माध्यम से आंतरिक परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर देना है।
युवाओं के लिए PYMA मीट
युवाओं को ध्यान और आत्मविकास से जोड़ने के उद्देश्य से PYMA (पिरामिड यूथ फॉर मेडिटेशन) मीट का आयोजन 31 अक्टूबर और 1 नवंबर 2026 को करल, महाराष्ट्र में प्रस्तावित है।
अंतरदर्शन रिट्रीट और अन्य कार्यक्रमों की जानकारी एवं पंजीकरण के लिए प्रतिभागी PMC App का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा “PMC Global” (https://www.pmcglobal.org?utm_source=chatgpt.com) और “PYMA Global” (https://www.pymaglobal.org?utm_source=chatgpt.com) पर भी जानकारी उपलब्ध है।
महा योग ध्यान कुंभ 9.0 में आध्यात्मिक ज्ञान, ध्यान, पारिवारिक जीवन में संतुलन और आत्मचिंतन के माध्यम से आंतरिक परिवर्तन के महत्व को रेखांकित किया गया। इसी संदेश को आगे बढ़ाते हुए अंतरदर्शन इनर वर्क रिट्रीट सीरीज-2027 की घोषणा की गई।

