परमार्थ गंगा आरती में शामिल हुए पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ विश्वशांति और मानव कल्याण हेतु प्रार्थना की



ऋषिकेश, 5 अक्टूबर। भारत के 14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ एवं उनकी धर्मपत्नी सुदेश धनखड़ ने सोमवार को परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के पावन गंगा तट पर आयोजित विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती में सहभाग किया। परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानन्द सरस्वती एवं साध्वी भगवती सरस्वती के सान्निध्य में आयोजित आरती में विश्वशांति, मानवता के कल्याण, राष्ट्र की समृद्धि तथा सभी के सुखमय जीवन की कामना की गई।

वैदिक मंत्रोच्चार, भजन, दीपों की दिव्य ज्योति और मां गंगा की आरती से पूरा गंगा तट आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा। उपराष्ट्रपति एवं उनकी धर्मपत्नी की उपस्थिति ने इस आध्यात्मिक आयोजन को विशेष बना दिया।

इस अवसर पर परमार्थ पीठाधीश्वर  स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भारतीय संस्कृति सबको स्वीकार करने और समस्त मानवता के कल्याण की संस्कृति है। ‘आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः’ का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि चारों दिशाओं से कल्याणकारी विचार हमारे जीवन में आएं। भारतीय संस्कृति केवल अपने लिए जीने की नहीं, बल्कि ‘जियो और जीने दो’ तथा ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को आत्मसात करने की संस्कृति है। आवश्यकता है कि इन जीवन-मूल्यों को आचरण में उतारकर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जाए।

पूर्व उपराष्ट्रपति  जगदीप धनखड़ ने अपने आध्यात्मिक अनुभव साझा करते हुए कहा कि  स्वामी चिदानन्द सरस्वती का सान्निध्य व्यक्ति के भीतर गुरुतत्त्व की भावना को जागृत करता है। उन्होंने कहा कि परमार्थ निकेतन में बिताए कुछ क्षणों ने उन्हें गहन आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान की।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ज्ञान प्रदान करती है और यह ज्ञान सदैव हमारे चित्त में रहना चाहिए। वेद, पुराण और उपनिषद ज्ञान के विशाल भंडार हैं। वर्तमान में मानव समाज अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है और इन चुनौतियों का समाधान भारतीय संस्कृति के जीवन-मूल्यों में निहित है।

धनखड़ ने कहा कि राष्ट्रसेवा सरल कार्य नहीं है और इसमें अनेक कठिनाइयां आती हैं, लेकिन हमारा लक्ष्य अर्जुन की तरह स्पष्ट और एकाग्र होना चाहिए। उन्होंने स्वामी विवेकानंद  का स्मरण करते हुए कहा कि आज भारत का युवा आध्यात्मिकता की ओर बढ़ रहा है, जो देश के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। भारत गौरव और नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है।

उन्होंने परमार्थ निकेतन को सभी का ‘हिमालयन होम’ बताते हुए सभी के सुखद, स्वस्थ एवं मंगलमय जीवन की कामना की।

साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि मां गंगा की गोद में आयोजित दिव्य गंगा आरती में  जगदीप धनखड़ एवं  सुदेश धनखड़ की उपस्थिति भावपूर्ण और सौभाग्य का क्षण है। उन्होंने कहा कि गंगा आरती हमें स्मरण कराती है कि भारत की आध्यात्मिक परंपरा केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति के प्रति प्रेम, सेवा, करुणा और समर्पण की जीवनशैली है। उन्होंने सभी से मां गंगा और प्रकृति की निर्मलता एवं गरिमा को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने का संकल्प लेने का आह्वान किया।


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