परमार्थ निकेतन और आयुशक्ति के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय निशुल्क पल्स रीडिंग हेल्थ चेकअप कैंप का आयोजन



                  ऋषिकेश (आशीष कुकरेती) 29 नवम्बर परमार्थ निकेतन   ऋषिकेश में स्वास्थ्य, सेवा और आयुर्वेद के समन्वय से युक्त दो दिवसीय निःशुल्क पल्स रीडिंग हेल्थ चेकअप कैंप का सफल आयोजन किया गया। यह विशेष शिविर परमार्थ निकेतन और आयुशक्ति के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया, जिसमें देश-विदेश से आये अनुभवी डॉक्टरों और थेरेपिस्टों ने सैकड़ों प्रतिभागियों को आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य मार्गदर्शन, नाड़ी परीक्षण और विविध प्राचीन उपचार प्रदान किए।

इस शिविर में प्रमुख रूप से पुराने घुटनों के दर्द, सिरदर्द, कमरदर्द, पीठदर्द, साइटिका, फ्रोजन शोल्डर, तथा नारियों के स्वास्थ्य से जुड़े विशेष परीक्षण एवं परामर्श दिए गए। स्वास्थ्य शिविर में आए प्रतिभागियों को निःशुल्क आयुर्वेदिक निदान, मर्म शक्ति चिकित्सा, पेन रिलीफ बाम, तथा अन्य चिकित्सीय सेवाएँ प्रदान की गईं, जिससे उन्हें त्वरित राहत और दीर्घकालिक स्वास्थ्य देखभाल के उपाय जानने का अवसर मिला।

शिविर का नेतृत्व विश्वप्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डॉ. स्मिता नरम और डॉ. कृष्णा नरम के मार्गदर्शन में हुआ। दोनों ही प्राचीन आयुर्वेद के मास्टर हीलर, नाड़ी विशेषज्ञ, डिटॉक्स विशेषज्ञ और प्रतिष्ठित स्वास्थ्य मार्गदर्शक हैं। उनके निर्देशन में विश्व के कई देशों से आए प्रशिक्षित थेरेपिस्टों ने प्रतिभागियों का नाड़ी परीक्षण कर उनकी शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक स्थिति का समग्र विश्लेषण किया और उन्हें व्यक्तिगत स्वास्थ्य सुझाव दिए।

दो दिवसीय इस स्वास्थ्य शिविर का उद्देश्य केवल उपचार प्रदान करना ही नहीं है, बल्कि लोगों को प्राचीन आयुर्वेद और नाड़ी विज्ञान की गहराई से अवगत कराना भी है। शिविर के दौरान प्रतिभागियों को बताया गया कि किस प्रकार नाड़ी पढ़कर शरीर के दोषों वात, पित्त और कफ का संतुलन समझा जा सकता है और उसी के अनुसार जीवनशैली एवं आहार में परिवर्तन कर दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ पाए जा सकते हैं।
स्वास्थ्य शिविर के दौरान प्रदान किए गए उपचारों का उद्देश्य प्रमुख रूप से दर्द से राहत और शरीर की गतिशीलता में सुधार, विशेषकर कमर दर्द, गठिया, साइटिका, फ्रोजन शोल्डर आदि में, प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाना, पाचन तंत्र को सुदृढ़ बनाना, मेटाबोलिज्म को संतुलित करना और हार्मोनल प्रणाली को स्थिर करना, मानसिक शांति प्रदान करते हुए तनाव, चिंता, अवसाद और भावनात्मक अवरोधों को कम करना एकाग्रता, स्मरण शक्ति, आत्मविश्वास और संपूर्ण जीवन ऊर्जा में सुधार करना, प्राचीन उपचार ज्ञान के माध्यम से गहरी विश्रांति, संतुलन और आंतरिक शांति का अनुभव कराना है।
मर्म शक्ति चिकित्सा, जो आयुर्वेद की एक अत्यंत प्रभावशाली उपचार पद्धति है, इसमें शरीर के विशेष ऊर्जा-बिंदुओं (मर्म बिंदु) पर हल्के प्रेशर और उपचार तकनीकों का प्रयोग कर ऊर्जा प्रवाह को संतुलित किया गया। यह विधि न केवल शारीरिक दर्द को कम करती है, बल्कि मानसिक स्पष्टता और भावनात्मक स्थिरता भी प्रदान करती है। अनेक प्रतिभागियों ने तत्काल राहत और हल्केपन का अनुभव व्यक्त किया।
शिविर में नाड़ियों की जाँच के दौरान डॉक्टरों ने प्रतिभागियों को उनके शरीर के दोषों, पाचन संबंधी समस्याओं, मानसिक तनाव, नींद की कमी, जीवनशैली से जुड़े विकारों और हार्मोनल असंतुलन के बारे में विस्तार से समझाया। उन्हें दैनिक दिनचर्या, योग, श्वास साधना, सरल आहार-विहार सुधार और विशिष्ट जड़ी-बूटियों के सेवन के बारे में भी मार्गदर्शन दिया गया।

परमार्थ निकेतन ने अपने योग परिसर में शिविर को शांत, स्वच्छ और प्राकृतिक वातावरण में आयोजित किया, जिससे प्रतिभागियों को उपचार के दौरान पूर्ण आध्यात्मिकता, ऊर्जा और शांति का अनुभव हुआ।
डॉ. स्मिता नरम और डॉ. कृष्णा नरम ने कहा कि नाड़ी विज्ञान केवल बीमारी का पता लगाने का साधन नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के सम्पूर्ण अस्तित्व शरीर, मन और आत्मा को समझने की एक वैज्ञानिक और आध्यात्मिक विधि है। उनका कहना है कि आयुर्वेद की प्राचीन चिकित्सा पद्धतियाँ आज भी उतनी ही प्रभावी हैं और यदि इन्हें जीवनशैली के साथ जोड़ा जाए तो गहरे स्तर पर स्वास्थ्य परिवर्तन संभव है।
दो दिवसीय इस शिविर में बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों, तीर्थयात्रियों और विभिन्न देशों से आए आगंतुकों ने सहभाग किया।


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