


ऋषिकेश (आशीष कुकरेती ) 11 सितंबर गीता आश्रम में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ समापन हुआ। 10 सितंबर कथा के समापन अवसर पर महामंडलेश्वर साध्वी अन्नपूर्णा गिरि ने कहा कि कथा का सार यही है कि भगवान अपने भक्तों के प्रेम और भाव के वश में होते हैं। भगवान की प्राप्ति के लिए भाव और भक्ति ही सबसे सरल उपाय है। भक्त भगवान के हृदय में निवास करते हैं और सच्ची भक्ति के माध्यम से मनुष्य भगवत प्राप्ति के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष डॉ. रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि भक्त भगवान का हृदय होते हैं। भक्ति की भावना से भगवत प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने कहा कि गुरु के बिना सच्चे ज्ञान की प्राप्ति संभव नहीं है। गुरु ही साधक को ज्ञान, भक्ति और आध्यात्मिक मार्ग का बोध कराते हैं।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान की लीलाओं और भक्तों की महिमा का श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया। सात दिनों तक चले कथा आयोजन में विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में सहभागिता की।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरि, महामंडलेश्वर स्वामी प्रकाशानंद, स्वामी दर्शन भारती, महंत एवं ट्रस्ट अध्यक्ष डॉ. दीपक गुप्ता, भानु मित्र शर्मा, कृष्णधार मिश्रा, पंकज शर्मा, प्रेम प्रसाद सहित मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश से आए बड़ी संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।

